“2020” ऐसा साल ना आए दोबारा

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नई दिल्ली। नया साल जिसका सभी को काफी बेसब्री से इंतज़ार हो रहा है क्योंकि वे आने वाले साल में बड़े बदलावों की उम्मीद कर रहे हैं ताकि वर्तमान में जिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है वह कुछ हद तक कम हो जाए और 2020 वर्ष से आखिरकार छुटकारा मिल जाए। सब लोग यह आशा लगाकर बैठे है कि नया साल उनके लिए लाभदायक साबित हो जिससे उनकी ज़िन्दगी में नयी खुशिया की दस्तक हो सके। गौरतलब है कि दुनिया भर में लोग साल के आखिरी दिन अपने निकट और प्रिय लोगों के साथ जश्न मनाकर नए साल का बड़े हर्षोल्लास से स्वागत करते है और 2020 के आगमन पर भी लोगों ने पुरे हर्षोल्लाष से जश्न मनाया और 2020 से कई उम्मीदें लगाई थी, लेकिन ख़ुशियाँ मनाने के बीच किसी ने यह नहीं सोचा था कि ये साल ख़ुशीयो का टोकरा लेकर आने की बजाए दुखों का पहाड़ लेकर आ रहा है। साल 2020 ना जाने कितने लोगों को अर्श से फर्श तक ले आने वाला वर्ष साबित हुआ है। अब आपको बताते है कि है कि इस साल क्या कुछ हुआ तथा कोरोना वायरस के अलावा क्या-क्या सुर्खियों में बना रहा।

जनवरी में एनपीआर और एनआरसी

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साल के शुरूआती महीने जनवरी में एनपीआर और एनआरसी बिल पर विभिन्न जगहों पर प्रदर्शन हुए, NRC (नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न्स) और NPR (नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर) एक जैसे प्रतीत होते हैं लेकिन दोनों में मूल अंतर है। एनपीआर देश के सामान्य निवासियों का एक रजिस्टर है। 10 दिसंबर, 2003 को अधिसूचित नागरिकता नियमों के अनुसार, एनपीआर में सिटीजनशिप रजिस्टर होता है जिसमें आमतौर पर एक गांव, ग्रामीण क्षेत्र, कस्बे, वार्ड या सीमांकित क्षेत्र में रहने वाले व्यक्तियों का विवरण होता है। एनआरसी एक रजिस्टर है जिसमें भारत और भारत के बाहर रहने वाले भारतीय नागरिकों का विवरण है।

फरवरी में दिल्ली दंगे

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23 फरवरी की रात जाफराबाद में समर्थक और विरोधी सीएए प्रदर्शनकारियों के बीच हुई छोटी लड़ाई सांप्रदायिक हिंसा में बदल गई और जो अगले चार दिनों में पूरी दिल्ली में फैल गई। इन दंगों में एक पुलिसकर्मी और एक आईबी कर्मी सहित दो लोगों की जान चली गई, जबकि सैकड़ों लोग घायल हो गए तथा मालोजान को काफी नुकसान पहुंचा। दिल्ली पुलिस ने दंगाइयों को रोकने के लिए हर मुमकिन कोशिश की और गंभीर स्थिति का सामना किया। इस हिंसा के चलते पुलिस ने सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार कर हिरासत में लिया गया।

मार्च में कोरोना महामारी

जनता कर्फ्यू
मार्च के महीने तक चीन के वुहान से फैले कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को अपने चपेट में ले लिया था। भारत में भी 2020 के शुरुआती महीनो में इसका असर देखने को मिला जिसके बाद केंद्र सरकार द्वारा देश में 22 मार्च (सुबह 7 से 9 बजे) से 14 घंटो के लिए जनता कर्फ्यू लगाया गया था। जिसमे हर व्यक्ति को कर्फ्यू का पालन करना अनिवार्य था। इस जनता कर्फ्यू में केवल पुलिसकर्मी, चिकित्सा सेवाओं, मीडिया, होम डिलीवरी जैसे “आवश्यक सेवाओं” के लोगों को छूट दी गई थी। जनता का हौसला बढ़ाने तथा फ्रोंटलीने वर्कर्स का अभिनन्दन के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने 22 मार्च को शाम 5 बजे, सभी नागरिकों को अपने दरवाजे, बालकनियों या खिड़कियों पर खड़े हो कर बर्तन व तालियां बजाने को कहा था।

लॉकडाउन

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पहला चरण
संक्रामक कोरोना वायरस के प्रसार पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने लॉकडाउन के चार चरण जारी किए जिसमें 25 मार्च को लॉकडाउन का पहला चरण लागू किया गया था। वही राष्ट्रव्यापी बंद की घोषणा से पहले ही 22 मार्च को ही भारतीय रेलवे ने 31 मार्च तक रेल यात्रा पर रोक लगाने की घोषणा कर दी थी। भारत सरकार ने जनता के बीच सकारात्मकता बनाए रखने के लिए लॉकडाउन के पहले चरण की अवधि 25 मार्च से 14 अप्रैल तक रखी थी।

दूसरा चरण
14 अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लॉकडाउन की अवधि को बढ़ा कर 3 मई किया गया जिस दौरान जिस दौरान लॉकडाउन 2 की घोषणा की गई। कोरोना संक्रमण को देखते हुए लॉकडाउन क्षेत्रों को तीन भागो में वर्गीकृत किया गया था जिसमें “रेड ज़ोन” जहा संक्रमण के मामले अधिक है, “ऑरेंज ज़ोन” जहा संक्रमण के संकेत कम है और “ग्रीन ज़ोन” जो बिना किसी संक्रमण वाला क्षेत्र है।

तीसरा चरण
4 मई को लॉकडाउन की अवधि दो सप्ताह आगे बढ़ा दिया गया था और पूरे देश में विभाजित लॉकडाउन क्षेत्र “रेड ज़ोन”, “ऑरेंज ज़ोन” और “ग्रीन ज़ोन” के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किये गए थे। तब ग्रीन जोन जिनमें पिछले 21 दिनों में कोई कोरोना मामले सामने नहीं आया हो, उन जोन में सामान्य आवाजाही व 50 प्रतिशत तक सीमित बसों के चलने की अनुमति दी गयी थी। वही ऑरेंज ज़ोन में केवल निजी और किराए के वाहनों की अनुमति जारी की गई थी लेकिन सार्वजनिक परिवहन पर रोक लगाई गई थी और वही रेड ज़ोन को लॉकडाउन के अंतर्गत रहने के निर्देश दिए गए थे।

चौथा चरण
लॉकडाउन का चौथे चरण की अवधि 18 से 31 मई तक रखी गयी जिसमे रेड ज़ोन को आगे सामग्री और बफर ज़ोन में विभाजित किया गया था। स्थानीय निकायों को बफर जोन नियंत्रित करने और सीमांकित करने का अधिकार दिया गया था।

अनलॉक की प्रक्रिया

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लॉकडाउन के बाद अनलॉक की प्रक्रिया शुरू की गयी जिसमें अनलॉक के 6 चरणों में अनलॉक के रूप में किया गया। अनलॉक की प्रक्रिया में सरकार ने धीरे-धीरे लॉकडाउन के दौरान जनता पर की गयी सख्ती को हटाना शुरू किया तथा जनता को राहत प्रदान की गई। पूरे देश में अनलॉक करने की प्रक्रिया की अवधि 1 जून से 30 नवंबर तक रही। जिस बीच सरकार ने देश की बिगाड़ती जा रही अर्थव्यवस्था को सँभालने के लिए सबसे पहले शराब के ठेको को खोलने का आदेश जारी किया। इसी बीच सामाजिक दूरी का पालन करते हुए स्वतंत्रता दिवस समारोह मनाया गया। 7 सितंबर देश में मेट्रो रेल को एक बार फिर से निरंतर रूप से चालू करने की अनुमति दी गई थी। शादी व शादी के बाकी कार्यक्रमों में केवल 50 लोगों के जमावड़े की अनुमति दी गयी और अंतिम संस्कारो में 20 लोगों के इक्कठा होने की अनुमति दी गयी। सार्वजनिक स्थानों, कार्यस्थलों और परिवहन के दौरान फेस कवरिंग / मास्क अनिवार्य किए गए थे ताकि कोरोना के बढ़ते मामलों पर काबू पाया जा सके।

मजबूरी बना न्यू फैशन ट्रेंड

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साल के शुरूआती महीनों से चेहरे पर लगातार मास्क लगाने से कई लोगों को सांस लेने व अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ा जिसके बाद लोगो ने मास्क लगाना कम कर दिए थे। खतरे को देखते हुए सरकार द्वारा मास्क न लगाने पर भारी जुर्माना लगाया गया। जिसके बाद मास्क लगाना अनिवार्य हो गया। मास्क की जरूरतों को देखते हुए लोग मास्क को अपने पहनावे का हिस्सा मानने लगे है यही नहीं बल्कि शादियों में भी लोग अपने कपडे के अनुसार मास्क बनवा रहे है। गौरतलब है कि जब तक कोरोना वायरस की वैक्सीन पूरी तरह से आ नहीं जाती इससे दूर रहने का फिलहाल एक ही तरीका है और वो है बचाव। सुरक्षा के उपायों में सबसे पहली जो चीज है वो है फेस मास्क। मास्क अब हमारी जिंदगी का एक जरूरी हिस्सा बन चुका है और धीरे-धीरे ये फैशन ट्रेंड भी बनता जा रहा है। स्टाइलिस्ट दिखने के लिए लोग अब कपड़ों से मैचिंग मास्क महनने लगे हैं। इतना ही नहीं शादियों में भी अब दुल्हन लहंगे से मैचिंग मास्क पहनने लगी हैं।

बच्चे हुए स्कूल से दूर

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वैसे तो कहा जाता है कि बच्चों को मोबाइल से दूर रखें लेकिन अभी बच्चों को पढ़ाई के लिए मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स इस्तेमाल करना पड़ रहा है जिसके चलते उनका स्क्रीन टाइम काफी हद तक बढ़ गया है। आजकल माता-पिता कुछ ऐसी ही दुविधा से दो-चार हो रहे हैं। बच्चे को पढ़ाना भी ज़रूरी है लेकिन उसकी सेहत भी अपनी जगह अहम है। साथ ही बच्चा कितना समझ पा रहा है ये भी देखना ज़रूरी है। छात्रों की पढ़ाई के घाटे व ऑनलाइन कक्षाओं में छात्रों को पढ़ने में दिक्कत होने के कारण भारत सरकार ने जनवरी 2021 तक सभी शैक्षणिक संस्थानों को खोलने का निर्णय लिया है, जिसमें भारत भर के स्कूल और कॉलेज और विश्वविद्यालय शामिल हैं।

कृषि कानून पर जारी प्रदर्शन

कृषि प्रणाली को बदलने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ने लोकसभा में 14 सितम्बर दो बिल पेश किए थे। जिसके खिलाफ किसानों के द्वारा निरंतर रूप से प्रदर्शन किया जा रहा है तथा नए कृषि कानून को वापिस लेने की मांग की जा रही है। हालांकि सरकार ने इस मामले में किसानो को आश्वासन दिया है कि लेकिन फिलहाल जो कानून है उसमें कोर्ट का अधिकार- क्षेत्र नहीं है। किसान मजदूर संघर्ष समिति के ज्वाइंट सेक्रेटरी सुखविंदर सिंह का कहना है कि हमारी मांगो की सुनवाई न होने पर आने वाले दिनों में हमारा आंदोलन और तेज हो जाएगा और साल की अंत तक दिल्ली व उत्तरी भारत के बाद बाकि राज्यों में भी किसानों का विरोध प्रदर्शन शुरू हो जाएगा। किसानों का कहना है कि सरकार जब तक ये तीनों कानून वापस नहीं लेती तब तक वह आराम से बैठने वाले नहीं हैं।

लंदन में मिला कोरोना का स्ट्रेन

ब्रिटेन में कोरोना वायरस में म्यूटेशन (कोरोनावायरस का नया वैरिएंट) की बात सामने आने के बाद पूरी दुनिया में हड़कंप मचा हुआ है। कई देशों ने कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। अब तक 25 देशों ने ब्रिटेन की फ्लाइट्स पर रोक लगा दी हैं। सऊदी अरब ने इससे भी बड़ा फैसला लेते हुए एक हफ्ते के लिए सभी इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर बैन लगा दिया। ब्रिटेन से निकलने के लिए लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी है। इस बीच, मुंबई में भी लंदन से लौटीं दो फ्लाइट के यात्रियों को एयरपोर्ट से सीधे होटल ले जाया गया। उन्हें यहां आइसोलेशन में रखा गया है। हालांकि, कुछ यात्रियों ने इस पर नाराजगी जताई और कहा कि उन्हें इस बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं थी। लंदन में हाल ही में कोरोना का नया स्ट्रेन (बदला रूप) मिला है। इसे पहले से 70% ज्यादा संक्रामक माना जा रहा है।

अगर सरल भाषा में कहा जाए तो यह साल पूरी दुनिया के लिए दुखद साबित हुआ है और लोगों का मानना है कि जिन कठिनाइयों का सामना उन्होने इस वर्ष किया है, वह “2020” जैसा साल दोबारा ना कभी देखे और इसलिए लोग इस साल के खत्म होने का इंतजार और नए साल के साथ नए खुशियों की उम्मीद लगाकर बैठे है। साथ ही लोगों के मनो में यह डर भी बैठा हुआ है कि आने वाला साल 2021 जाते हुए वर्ष 2020 की तरह दुखदाई साबित न हो। गौरतलब है कि खुशियों के साथ 2021 के आने पर चिंताओं का भी माहौल बना हुआ है। हम भगवान से प्रार्थना करते है कि आने वाला वर्ष पूरे भारत तथा दुनिया के लिए शुभदायक साबित हो तथा लोगों को इस साल हुई परेशानियों से पूरी तरह निजात जल्द से जल्द मिल सके।

The year like “2020” does not come again


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