किसानों के ट्रैक्टर मार्च को खूनी रैली में बदलने की थी बड़ी साजिश

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नई दिल्ली। किसान संगठनों के नेताओं ने कल शाम को एक इम्प्रॉम्प्टू प्रेस कॉन्फ्रेंस की व्यवस्था की, पहले यह माना जा रहा था कि शायद चल रहे आंदोलन में उन्हें कोई बड़ी उपलब्धि हाथ लगी है और शायद 12 वें दौर की बैठक की विफलता के बाद ही सहीं केंद्र सरकार ने किसानों की सभी बातों को मान लिया है। लेकिन किसान आंदोलन की सुरक्षा समिति ने कल रात सिंघु बॉर्डर से एक संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ा है, जो चल रहे शांतिपूर्ण किसानों के विरोध को रूपांतरित करना चाहते था।

किसान नेता इस संदिग्ध व्यक्ति को कल शाम मीडिया के सामने लेकर आए, जहां उसने बताया कि उसे 26 जनवरी को होने वाले ट्रैक्टर मार्च के दिन 4 किसान नेताओं को गोली मारने के निर्देश दिए गए थे तथा इस मार्च को हिंसक बनाना था। किसान नेताओं के इस दावे पर अभी तक ना तो हरियाणा सरकार और ना ही हरियाणा पुलिस ने कोई बयान दिया है। वहीं दिल्ली सरकार ने कि हमारा सबसे बुरा डर सच साबित हो रहा है। इससे समझ आता है कि वे (केंद्र सरकार) किस तरह से किसान आंदोलन को खत्म करना चाहते हैं।

पकड़े गए व्यक्ति ने कहा, हमारा प्लान था कि 26 जनवरी को हम पहली लाइन पर गोली चलाएंगे। इसके बाद दिल्ली पुलिस किसानों को रोकने की कोशिश करेगी। अगर वो नहीं रुकते तो इन पर गोली चलाने का ऑर्डर है। पीछे से हमारी टीम, जिसमें हरियाणा के 8-10 लड़के हैं, वो शूट करेगी। पुलिस को ये लगेगा कि गोलियां किसानों ने चलाई हैं। उसने आगे कहा, ट्रैक्टर रैली में गैंग के आधे लोग पुलिस की वर्दी में होंगे, जो किसानों को तितर-बितर करेंगे। इसके बाद मंच पर जो 4 लोग (किसान नेता) होंगे, उन्हें शूट करने का प्लान है। 4 लोगों की फोटो हमें दे दी गई हैं।

जिसने हमें ये काम सौंपा, उसका नाम प्रदीप सिंह है, वो थाना प्रभारी है। हमने उसे कभी थाने के आगे नहीं देखा। जब भी हमसे मिलने आता था, चेहरा कवर करके आता था। हमने उसका बैज देखा है। जिन लोगों को मारना था, उनका नाम हमें नहीं पता, उनकी फोटो हमारे पास थी।


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