“विकसित भारत @2047 की ओर बड़ा कदम: मुकदमों के बोझ से मुक्त होगा सरकारी तंत्र

नई दिल्ली | नरेंद्र धवन

भारत सरकार ने ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में कानूनी सुधारों को एक नई गति दी है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित “केंद्रीय सचिवों और विधि अधिकारियों के राष्ट्रीय सम्मेलन” में सरकारी मुकदमों के कुशल प्रबंधन और संस्थागत ढांचे को मजबूत करने पर गहन मंथन किया गया।

सम्मेलन का विषय था सरकारी मुकदमेबाजी के कुशल और प्रभावी मैनेजमेंट” । इस कार्यक्रम में कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, कैबिनेट सचिव डॉ. टी.वी. सोमनाथन, अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल सहित देश के शीर्ष नीति निर्धारकों ने हिस्सा लिया।

इस कार्यक्रम में कानून और न्याय मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल; कैबिनेट सचिव डॉ. टी.वी. सोमनाथन;  भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी; भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता; न्याय विभाग के सचिव डॉ. नीरज वर्मा और विधि कार्य विभाग के सचिव डॉ. राजीव मणि उपस्थित रहे।

सम्मेलन मे उन प्रमुख बाधाओं की पहचान पर चर्चा की गई जो अदालतों में देरी और मुकदमों की संख्या बढ़ाती हैं, जैसे सर्विस मामलों मे अलग-अलग मंत्रालयों द्वारा एक ही कानून पर अलग-अलग राय लेना और नीतिगत फैसलों के बजाय ‘डिफ़ॉल्ट’ अपील करने की प्रवृत्ति। तकनीकी और कानूनी टीमों के बीच तालमेल की कमी के कारण जमीन मुआवजे और अनुबंध विवादों का बढ़ना एवं  विभाग और पैनल काउंसल के बीच संचार की कमी पर विस्तृत चर्चा हुई

सम्मेलन में भविष्य के लिए एक स्पष्ट रूपरेखा तैयार की गई है, जिससे अपील फाइल करने के लिए सख्त मानदंड बनाना ताकि अनावश्यक मामले कम किया जा सके, विभागीय मुकदमों के समन्वय के लिए नोडल अधिकारी अधिकारी की नियुक्ति, ‘प्री-लिटिगेशन मध्यस्थता’ (ADR) को अनिवार्य बनाना व आर्बिट्रल अवॉर्ड को चुनौती देने से पहले समितियों द्वारा उसकी कानूनी और वित्तीय संवेदनशीलता की जांच आदि सुधार शामिल रहे।

विधि कार्य विभाग ने माना कि सभी मंत्रालयों में एक समान कानूनी राय होनी चाहिए, खास तौर पर टैक्स, राजस्व और प्रवर्तन (Enforcement) के मामलों में ऐसी रणनीति अपनाई जाएगी ताकि विवाद शुरुआती स्तर पर ही सुलझ जाएं और ऊपरी अदालतों का बोझ कम हो सके।

“यह राष्ट्रीय सम्मेलन केवल कानूनी प्रक्रियाओं के सरलीकरण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह ‘न्याय की सुगमता’ (Ease of Justice) सुनिश्चित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। जब सरकार स्वयं एक अनुशासित याचिकाकर्ता बनेगी, तभी ‘विकसित भारत @2047’ की नींव पर न्यायपूर्ण समाज का निर्माण होगा।

Narender Dhawan
Author: Narender Dhawan

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