बाहरी-उत्तरी जिला पुलिस ने एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) की जानकारी के आधार पर स्वरूप नगर क्षेत्र में चल रहे देह-व्यापार के गैरकानूनी धंधे का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में एक महिला और उसके सहयोगियों द्वारा नाबालिग लड़कियों को जबरन देह-व्यापार में धकेला जा रहा था। पुलिस ने छापेमारी कर मुख्य आरोपी महिला सहित छह लोगों को हिरासत में लिया है। इस कार्रवाई में एक 15 वर्षीय नाबालिग किशोरी और एक गर्भवती महिला सहित चार महिलाओं को मुक्त कराया गया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में तीन ग्राहक भी शामिल हैं। पुलिस ने इस मामले में जबरन देह-व्यापार, पॉक्सो एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। छापेमारी के दौरान पुलिस को मौके से आपत्तिजनक सामग्री भी बड़ी मात्रा में मिली है।
बाहरी-उत्तरी जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी हरेश्वर स्वामी ने बताया कि बुधवार को एक एनजीओ के कार्यकर्ता ज्योति और शिवम ने स्वरूप नगर की गली नंबर-3 में नाबालिग लड़कियों से देह-व्यापार करवाने की शिकायत दर्ज कराई थी। इस सूचना पर तुरंत कार्रवाई करते हुए पुलिस ने एक विशेष टीम गठित की। एनजीओ के सदस्य शिवम ने नकली ग्राहक बनकर देह-व्यापार के अड्डे पर संपर्क किया और एक दलाल को ऑनलाइन एक हजार रुपये का भुगतान किया। इसके बाद उसने पुलिस को संकेत दिया।
पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंची, जहां उन्हें 50 वर्षीय भारती नाम की महिला, उसके सहयोगी 40 वर्षीय देवेश यादव और अर्जुन कुमार मिले। इसके अलावा तीन ग्राहक—साजिद, अखिलेश और रजनीश—भी वहां मौजूद थे। पुलिस ने इन सभी को गिरफ्तार कर लिया। छापेमारी के दौरान पुलिस ने 15 साल की एक किशोरी, 25 साल की एक गर्भवती महिला, 35 साल और 52 साल की दो अन्य महिलाओं को मुक्त कराया, जिन्हें जबरन देह-व्यापार में धकेला गया था।
मुक्त कराई गई लड़कियों ने पुलिस को बताया कि भारती, देवेश और अर्जुन ने उन्हें इस गैरकानूनी धंधे में शामिल होने के लिए मजबूर किया था। पुलिस को मौके से आपत्तिजनक सामग्री के साथ-साथ एक डायरी भी बरामद हुई, जिसमें देह-व्यापार से संबंधित हिसाब-किताब दर्ज था। पुलिस अब इस रैकेट के संचालन की अवधि और अन्य संलिप्त लोगों की जानकारी जुटाने के लिए गहन पूछताछ कर रही है।