चंडीगढ़
हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस सभी दलों के निशाने पर है। चुनाव में पांच विधायकों द्वारा क्रास वोटिंग करने और चार विधायकों की वोट रद होने के बाद जहां कांग्रेस में जबरदस्त तरीके से गुटबाजी बढ़ी है, वहीं इनेलो काफी हद तक भाजपा की बी टीम होने के कांग्रेस के आरोपों को खारिज करने में सफल साबित हुई है। कांग्रेस में गुटबाजी की स्थिति यह है कि सभी धड़े एक दूसरे पर खुलकर सवाल उठा रहे हैं। इस गुटबाजी के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह के पूर्व सांसद बेटे बृजेंद्र सिंह की सद्भावना यात्रा का सिलसिला नहीं थमा है।
बृजेंद्र सिंह ने चुनाव से पहले भी कांग्रेस विधायकों को क्रास वोटिंग नहीं करने की नसीहत दी थी। साथ ही कहा था कि यदि क्रास वोटिंग हुई तो आरोपित विधायकों की खैर नहीं, क्योंकि राज्यसभा चुनाव से सीधे तौर पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है। राहुल गांधी ने कर्मवीर बौद्ध को कांग्रेस का उम्मीदवार बनाया था। यह बात सही है कि कर्मवीर बौद्ध को न तो भूपेंद्र सिंह हुड्डा पसंद करते थे और न ही कांग्रेस का कोई विधायक उनके नाम को पचा पा रहा था, लेकिन कहीं न कहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को यह आभास था कि अगर कर्मवीर बौद्ध चुनाव हार गए तो उनके राजनीतिक भविष्य के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
अपने राजनीतिक भविष्य की चिंता के वशीभूत ही सही, कर्मवीर बौद्ध को कांग्रेस नेता चुनाव जिताने में कामयाब हो गए, लेकिन उनकी जीत भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल से मात्र 0.44 प्रतिशत मतों से हुई है, जो बहुत बढ़िया स्थिति नहीं है। कांग्रेस के 37 विधायकों में से कर्मवीर बौद्ध को सिर्फ 28 वोट मिले, जबकि पांच वोट क्रास हो गए और चार वोट रद हो गए। कांग्रेस नेता अपनी झेंप मिटाने के लिए बार-बार दावा कर रहे हैं कि सिर्फ पांच नेताओं ने क्रास वोट की है, जबकि जिन चार कांग्रेस विधायकों की वोट रद हुई है, वह पता नहीं किया जा सकता, मगर सच्चाई यह है कि कांग्रेस के नौ वोट खराब हुए हैं अथवा खराब किए गए हैं।
हरियाणा भाजपा के अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली ने स्पष्ट दावा किया है कि सतीश नांदल के संपर्क में 12 कांग्रेस विधायक थे। कांग्रेस के जिस तरह से नौ वोट खराब हुए हैं, उससे मोहन लाल बडौली का दावा सही प्रतीत हो रहा है। हुड्डा गुट के लिए अगर संतोषजनक है तो वह ये कि जिन पांच कांग्रेस विधायकों ने वोट क्रास की है, उसमें दो कुमारी सैलजा गुट की विधायक हैं।
हाल ही में एक कार्यक्रम में कुमारी सैलजा ने नारायणगढ़ की विधायक शैली चौधरी के पति रामकिशन गुर्जर की अनदेखी कर स्पष्ट संदेश दे दिया कि राहुल गांधी के उम्मीदवार को हराने की कोशिश करने वाला कोई विधायक उनका अपना नहीं हो सकता। लेकिन हुड्डा गुट को हाईकमान के समक्ष यह कहने का मौका मिल गया है कि सैलजा गुट के विधायकों ने भी गड़बड़ की है, जबकि सैलजा गुट के पास हुड्डा गुट के बारे में हाईकमान के समक्ष कहने के लिए उनसे ज्यादा तथ्य मौजूद हैं।
हरियाणा में पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह पिछले कई माह से सद्भाव यात्रा निकाल रहे हैं। कांग्रेस प्रभारी बीके हरिप्रसाद और प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह हालांकि बृजेंद्र सिंह यात्रा को सिरे से खारिज कर चुके थे, लेकिन राहुल गांधी ने बृजेंद्र सिंह की पीठ पर हाथ धरा तो सब चुप्पी साध गए। अपनी यात्रा के बाद से अब तक राहुल गांधी मुलाकात व बातचीत के लिए बृजेंद्र सिंह को तीन बार दिल्ली बुला चुके हैं। बृजेंद्र सिंह की यात्रा अप्रैल-मई तक संचालित होगी। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि यदि राज्य में हुड्डा व सैलजा गुट की लड़ाई इसी तरह से चलती रही और कांग्रेस आपसी फूट का शिकार रही तो आने वाले समय में राहुल गांधी की ओर से बृजेंद्र सिंह को कांग्रेस के बड़े चेहरे के रूप में स्थापित किया जा सकता है।