सायोनी घोष हों या काकोली घोष दस्तीदार… BJP ने TMC के बागियों से क्यों बनाई दूरी?

नईदिल्ली 
सयोनी घोष, यूसुफ पठान हों या काकोली घोष… सभी ने बंगाल चुनाव में टीएमसी की हार के बाद ममता का साथ छोड़ा. टीएमसी के बागी सांसदों ने एनडीए का हिस्सा बनना पसंद किया. वे सभी एसीपीआई यानी नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल हुए. यह एनसीपीआई दिल्ली में भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए का हिस्सा है. अब टीएमसी के उन बागी सांसदों को भाजपा ने ही झटका दिया है. जी हां, बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी नगर निकाय चुनाव अकेले लड़ने का फैसला किया है. भारतीय जनता पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस यानी TMC के उन बागी सांसदों के साथ गठबंधन की संभावना को खारिज कर दिया है, जो अब नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का हिस्सा हैं। 

बीजेपी का यह फैसला इसलिए अहम है क्योंकि इस साल हुए विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल करने के बाद अब पार्टी की नजर कोलकाता और हावड़ा के नगर निकाय चुनावों पर है. इन दोनों चुनावों को बीजेपी के लिए बड़ी राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है. केएमसी यानी कोलकाता नगर निगम (KMC) और हावड़ा नगर निगम (HMC) के चुनाव दुर्गा पूजा के बाद होने की उम्मीद है. दोनों नगर निगमों के वार्डों की सीमाओं में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं. इसे परिसीमन कहा जाता है. इसके तहत मतदाताओं की संख्या और इलाकों के आधार पर वार्डों की सीमाएं फिर से तय की जाती हैं। 

खबर के मुताबिक, बंगाल प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने हाल में कहा, ‘पश्चिम बंगाल में बीजेपी का कोई गठबंधन सहयोगी नहीं है. हम कोलकाता और हावड़ा नगर निकाय चुनाव अपने दम पर लड़ेंगे और जीतेंगे.’ उन्होंने कहा कि दिल्ली में एनसीपीआई के साथ कोई राजनीतिक समझ हो सकती है, लेकिन दिल्ली और कोलकाता के बीच करीब 1,500 किलोमीटर की दूरी है. उनका कहना था कि राष्ट्रीय स्तर पर किसी पार्टी के साथ राजनीतिक संबंध होने का यह मतलब नहीं है कि पश्चिम बंगाल में भी उसी पार्टी के साथ चुनावी गठबंधन किया जाए। 

विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी का बढ़ा आत्मविश्वास
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में प्रदर्शन के बाद बीजेपी को कोलकाता में भी अपना आधार मजबूत होने का भरोसा है. केएमसी में पहले बीजेपी की स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी. लेकिन विधानसभा चुनाव में कोलकाता की ज्यादातर सीटों पर लोगों ने बीजेपी को वोट दिया. केएमसी चुनाव की जिम्मेदारी संभाल रहे बीजेपी नेता रितेश तिवारी ने कहा कि पार्टी सभी 209 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और बड़ी जीत हासिल करेगी। 

NCPI को अब भी गठबंधन की उम्मीद
वहीं, दूसरी तरफ टीएमसी के बागी गुट वाले सांसदों की फौज वाली NCPI को अभी भी बीजेपी के साथ गठबंधन की उम्मीद है. पार्टी का तर्क है कि वह संसद में बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA के साथ है. इसलिए नगर निकाय चुनाव में भी दोनों दलों के साथ आने की संभावना है. NCPI की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि उनकी पार्टी एनडीए की सबसे बड़ी सहयोगी पार्टियों में से एक है और वह गठबंधन के सदस्य के रूप में निकाय चुनाव लड़ेगी. उन्होंने कहा कि चुनाव के करीब आने पर गठबंधन को लेकर फैसला किया जाएगा, लेकिन साथ आने की पूरी संभावना है। 

गौरतलब है कि बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी के खराब प्रदर्शन के बाद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में 20 सांसदों ने पार्टी छोड़ दी थी. इसके बाद वे NCPI में शामिल हो गए. इसमें सयोनी घोष भी शामिल थीं. ये सांसद दिल्ली में NDA की बैठकों में भी शामिल होते रहे हैं। 

बंगाल बीजेपी क्यों नहीं चाहती TMC के बागियों से गठबंधन?
अब सबसे बड़ा सवाल है कि आकिर बंगाल में बीजेपी टीएमसी के बागियों संग गठबंधन क्यों नहीं चाहती? दरअसल, पश्चिम बंगाल बीजेपी के कई नेताओं का मानना है कि पार्टी को अपने संगठन और कार्यकर्ताओं के दम पर चुनाव लड़ना चाहिए. एक सीनियर बीजेपी नेता ने कहा कि यह बंगाल में सत्ता में आने के बाद पार्टी का पहला नगर निकाय चुनाव होगा. इसलिए बीजेपी अपने संगठन, नेताओं और कार्यकर्ताओं की ताकत को आजमाना चाहती है. उन्होंने यह भी कहा कि NCPI के कई नेता पहले TMC में थे. बंगाल में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने इन्हीं नेताओं के खिलाफ लंबे समय तक संघर्ष किया है. कई बीजेपी कार्यकर्ताओं ने इस राजनीतिक लड़ाई में अपनी जान तक गंवाई है. ऐसे में अगर बीजेपी अब उन्हीं पूर्व TMC नेताओं के साथ हाथ मिलाती है तो पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच गलत संदेश जा सकता है. इसके अलावा बीजेपी TMC नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाती रही है. पार्टी निकाय चुनाव में भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था का वादा करना चाहती है. ऐसे में TMC के कुछ नेताओं के साथ गठबंधन करने पर मतदाताओं के बीच सवाल खड़े हो सकते हैं। 

कई पार्टियों के बीच मुकाबले का फायदा उठाना चाहती है BJP
बीजेपी के अकेले चुनाव लड़ने के पीछे राजनीतिक गणित भी है. राज्य में मुकाबला सिर्फ बीजेपी और TMC के बीच नहीं होगा. NCPI, ममता बनर्जी की TMC, TMC से अलग हुए विधायक, वाम दल और कांग्रेस भी मैदान में होंगे. बीजेपी को लगता है कि अगर वोट कई पार्टियों में बंटता है तो उसे फायदा मिल सकता है. इसी वजह से पार्टी अकेले चुनाव लड़कर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। 

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Author: Editor

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