दिल्ली में आप नेता सौरभ भारद्वाज के आवास समेत 13 स्थानों पर ईडी की छापेमारी

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख नेता और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज के घर सहित 13 ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई अस्पताल निर्माण में कथित अनियमितताओं और धन शोधन के एक मामले से जुड़ी हुई है। ईडी अधिकारियों ने बताया कि उनकी एक टीम ने दिल्ली और इसके आसपास के क्षेत्रों में यह तलाशी अभियान चलाया, जिसमें सौरभ भारद्वाज का आवास भी शामिल है।

आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस छापेमारी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केंद्र की मोदी सरकार जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आप को निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि पार्टी ने मोदी सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ सबसे मुखर आवाज उठाई है। आप की ओर से जारी बयान में इस कार्रवाई को जनता का ध्यान भटकाने की रणनीति करार दिया गया है। पार्टी ने दावा किया कि सौरभ भारद्वाज के खिलाफ दर्ज मामला पूरी तरह से झूठा और बेबुनियाद है।

आप के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह छापेमारी केवल ध्यान भटकाने का प्रयास है। उन्होंने बताया कि जिस समय का यह मामला है, उस दौरान सौरभ भारद्वाज कोई मंत्री नहीं थे, इसलिए यह आरोप पूरी तरह से निराधार है।

आप सांसद संजय सिंह ने भी ईडी की कार्रवाई को फर्जी और बिना आधार का बताया। उन्होंने कहा कि जब यह मामला दर्ज किया गया, तब सौरभ भारद्वाज मंत्री नहीं थे। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार की नीति है कि आप नेताओं के खिलाफ झूठे मामले बनाए जाएं और उन्हें जेल में डाला जाए। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह छापेमारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित फर्जी डिग्री के मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए की गई है।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि सौरभ भारद्वाज के घर पर छापा इसलिए मारा गया क्योंकि हाल ही में पूरे देश में पीएम मोदी की डिग्री को लेकर सवाल उठ रहे हैं, जो कथित तौर पर फर्जी है। उन्होंने सत्येंद्र जैन का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें तीन साल तक जेल में रखा गया, लेकिन बाद में सीबीआई और ईडी ने कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। इससे साफ होता है कि आप नेताओं पर लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं।

पूर्व दिल्ली सीएम आतिशी ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह छापेमारी इसलिए की गई क्योंकि देशभर में पीएम मोदी की डिग्री की वैधता पर चर्चा हो रही है। आतिशी ने कहा कि जिस समय का यह मामला बताया जा रहा है, उस दौरान सौरभ भारद्वाज मंत्री नहीं थे, इसलिए यह पूरा मामला ही फर्जी है।

गौरतलब है कि 24 जून 2025 को दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने आप सरकार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्रियों सत्येंद्र जैन और सौरभ भारद्वाज के खिलाफ कथित अस्पताल घोटाले की जांच को मंजूरी दी थी। यह शिकायत भाजपा नेता विजेंद्र गुप्ता ने 22 अगस्त 2024 को दर्ज की थी, जिसमें सौरभ और सत्येंद्र पर स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार और साठगांठ के आरोप लगाए गए थे। आप ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

आरोपों के अनुसार, साल 2018-19 में 24 अस्पताल परियोजनाओं (11 ग्रीनफील्ड और 13 ब्राउनफील्ड) के लिए 5590 करोड़ रुपये की लागत स्वीकृत की गई थी, जिसमें बड़े पैमाने पर वित्तीय हेरफेर का दावा किया गया है। सितंबर 2021 में 6800 बिस्तरों की क्षमता वाले सात आईसीयू अस्पतालों के निर्माण के लिए 1125 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गई थी, लेकिन तीन साल बाद भी केवल 50% काम पूरा हुआ, जिस पर 800 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।

लोकनायक अस्पताल के नए ब्लॉक के लिए 465.52 करोड़ रुपये की लागत स्वीकृत थी, लेकिन चार साल में 1125 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, जो स्वीकृत राशि से लगभग तीन गुना है। पॉलीक्लिनिक परियोजना के लिए 168.52 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे, जिसमें 94 पॉलीक्लिनिक्स बनाए जाने थे, लेकिन 52 पॉलीक्लिनिक्स के निर्माण पर ही 220 करोड़ रुपये खर्च हो गए। इसके अलावा, स्वास्थ्य सूचना प्रबंधन प्रणाली को लागू करने में एक दशक से अधिक की देरी हुई, जिसमें वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। मंत्रियों ने कथित तौर पर एनआईसी की ई-हॉस्पिटल प्रणाली जैसे लागत प्रभावी विकल्पों को बार-बार नकारा।

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Author: Office Desk

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