अरब सागर में भारत-पाक नौसैनिक जहाजों की टक्कर, INS कोलकाता से भिड़ा PNS हुनैन

 नई दिल्ली
उत्तरी अरब सागर में भारतीय नौसेना के विध्वंसक पोत INS कोलकाता और पाकिस्तानी नौसेना के गश्ती जहाज PNS हुनैन के बीच हुई टक्कर ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच समुद्री सीमा और कूटनीतिक तनाव को एक बार फिर बढ़ा दिया है। भारत के अनुसार, 15 सितंबर को यह हादसा उस समय हुआ जब पाकिस्तानी जहाज ने तेज रफ्तार में आकर बेहद गैर पेशेवर तरीके से खतरनाक ओवरटेकिंग की कोशिश की। भारत ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए नई दिल्ली में पाकिस्तान के कार्यवाहक राजदूत को तलब किया और 1991 के द्विपक्षीय समझौते के उल्लंघन पर विरोध दर्ज कराया।

भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, PNS हुनैन का यह कदम 1991 के भारत-पाकिस्तान समझौते के धारा 10 का स्पष्ट उल्लंघन था। इस समझौते के तहत दोनों देशों के युद्धपोतों को एक-दूसरे से कम से कम 3 नॉटिकल मील (लगभग 5.5 किमी) की दूरी बनाए रखना अनिवार्य है। टक्कर के बावजूद भारतीय नौसेना के 7400 टन वजनी गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर INS कोलकाता को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा और वह समुद्र में अपनी तैनाती पर बना हुआ है। वहीं, लगभग 2,600 टन वजनी पाकिस्तानी गश्ती पोत PNS हुनैन बुरी तरह क्षतिग्रस्त होकर अपने बंदरगाह लौटने पर मजबूर हो गया।

पाकिस्तान ने इस घटना पर भारत पर उसके नौसैनिक अभ्यास में बाधा डालने का आरोप लगाया। भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए टालमटोल वाला रवैया बताया।

क्या है भारत-पाकिस्तान समुद्री विवाद का मूल कारण?
समुद्र में दोनों देशों के बीच अक्सर पैदा होने वाले तनाव के पीछे मुख्य रूप से चार बड़े कारण हैं। गुजरात और पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बीच 96 किमी लंबी सर क्रीक दलदली सीमा रेखा को लेकर दशकों पुराना विवाद है। सीमा का सही सीमांकन न होने के कारण दोनों देशों के बीच अरब सागर में एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (EEZ) का दायरा तय नहीं हो पाया है, जहां तेल, प्राकृतिक गैस और विशाल मत्स्य संसाधन मौजूद हैं।

स्पष्ट समुद्री सीमा न होने के कारण दोनों देशों के मछुआरे अक्सर एक-दूसरे के जलक्षेत्र में प्रवेश कर जाते हैं। इसके चलते तटरक्षक बल नियमित रूप से मछुआरों को गिरफ्तार करते हैं और उनकी नौकाएं जब्त कर लेते हैं। 2008 के मुंबई आतंकी हमले के बाद भारत ने अपनी समुद्री सीमाओं पर निगरानी बेहद सख्त कर दी है।

समुद्री हादसों और सैन्य झड़पों को रोकने के लिए 1991 में बनाए गए सुरक्षा नियमों का उल्लंघन ऐसी घटनाओं का कारण बनता है। 3 नॉटिकल मील की दूरी का नियम न मानने से कई बार गंभीर दुर्घटनाएं होने की आशंका बनी रहती है। भारतीय नौसेना अपने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्गों और समुद्री सुरक्षा को बनाए रखने के लिए उत्तर-पश्चिमी अरब सागर में निरंतर गश्त करती है। दूसरी ओर पाकिस्तान अपनी तटरेखा और ग्वादर बंदरगाह जैसे रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा के नाम पर ऐसी आक्रामक पैंतरेबाजी करता रहता है।

Editor
Author: Editor

Leave a Comment