‘विकसित भारत 2047’ के लिए मजबूत सांख्यिकी ढांचा: GDP, CPI और IIP पर MoSPI की पहल

नरेंद्र धवन ।

नई दिल्ली,

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने सकल घरेलू उत्पाद (GDP), उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के आधार वर्ष संशोधन पर दूसरी पूर्व-रिलीज परामर्श कार्यशाला का आयोजन 23 दिसंबर 2025 को भारत मंडपम, प्रगति मैदान, नई दिल्ली में किया। ज्ञात रहे पहली पूर्व-रिलीज परामर्श कार्यशाला का आयोजन 26 नवंबर 2025 को मुंबई में किया गया था।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य संशोधित GDP, CPI और IIP श्रृंखलाओं के जारी होने से पहले प्रस्तावित पद्धतिगत और संरचनात्मक सुधारों को साझा कर पारदर्शिता बढ़ाना, सूचित संवाद को प्रोत्साहित करना और व्यापक परामर्श सुनिश्चित करना था। वित्त वर्ष 2022-23 को आधार वर्ष मानकर नई राष्ट्रीय लेखा श्रृंखला और IIP श्रृंखला क्रमशः 27 फरवरी 2026 और 28 मई 2026 को जारी किया जाना है, जबकि 2024 को आधार वर्ष मानकर CPI की नई श्रृंखला 12 फरवरी 2026 को जारी की जाएगी।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन के. बेरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग, मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंथा नागेश्वरन तथा महानिदेशक (केंद्रीय सांख्यिकी) एन. के. संतोषी भी मंचासीन थे। कार्यशाला में प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों, वित्तीय संस्थानों एवं बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों, विषय विशेषज्ञों, प्रमुख सांख्यिकीय आंकड़ों के उपयोगकर्ताओं तथा केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

अपने उद्घाटन संबोधन में सुमन के. बेरी ने MoSPI द्वारा तैयार किए जाने वाले आंकड़ों की विश्वसनीयता और प्रामाणिकता से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए विभिन्न हितधारकों और डेटा उपयोगकर्ताओं के साथ संवाद के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पूर्व-रिलीज परामर्श कार्यशाला इस दिशा में एक सराहनीय कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के निकट भविष्य में उच्च-मध्यम आय वाले देश की ओर बढ़ने के परिप्रेक्ष्य में प्रगति को मापने के लिए सटीक और विश्वसनीय आंकड़े अत्यंत आवश्यक हैं।

MoSPI के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग ने अपने संबोधन में ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए डेटा-आधारित निर्णय लेने के महत्व को रेखांकित किया। संशोधित श्रृंखलाओं की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने असंगठित क्षेत्र के आकलन के लिए वार्षिक असंगठित क्षेत्र उद्यम सर्वेक्षण के उपयोग, सिंगल डिफ्लेशन के स्थान पर डबल डिफ्लेशन और वॉल्यूम/सिंगल एक्सट्रापोलेशन के प्रयोग, जीएसटी और पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) जैसे नए डेटा स्रोतों के उपयोग, राष्ट्रीय लेखा ढांचे के साथ आपूर्ति एवं उपयोग तालिका (SUT) के एकीकरण, CPI के लिए वास्तविक समय डेटा संग्रह तथा ग्रामीण और शहरी बाजारों के विस्तारित कवरेज और IIP के अधिक सूक्ष्म स्तर पर संकलन जैसे सुधारों का उल्लेख कर कई रोचक आकड़े प्रस्तुत किए गए ।

मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंथा नागेश्वरन ने MoSPI के इस प्रयास की सराहना की और कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं शोधकर्ताओं, विशेषज्ञों और डेटा उपयोगकर्ताओं को GDP, CPI और IIP की नई श्रृंखलाओं में किए जा रहे सुधारों को समझने का अवसर प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि असंगठित क्षेत्र का मापन अपेक्षाकृत चुनौतीपूर्ण है, लेकिन पारदर्शी, सुसंगत और समय के साथ तुलनीय अनुमान देने वाली पद्धति को एक मजबूत पद्धति माना जा सकता है।

स्वागत भाषण में महानिदेशक (केंद्रीय सांख्यिकी) एन. के. संतोषी ने मुख्य अतिथि और सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने आधार वर्ष संशोधन की प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि GDP, CPI और IIP के संशोधन के लिए गठित विशेषज्ञ समितियों ने कई बैठकों के बाद नई श्रृंखलाओं में किए जाने वाले सुधारों को अंतिम रूप दिया है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत दिशानिर्देशों के अनुरूप हैं।

उद्घाटन सत्र के बाद राष्ट्रीय लेखा, CPI और IIP पर तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें संशोधित श्रृंखलाओं में प्रस्तावित सुधारों पर प्रस्तुतियां दी गईं। इसके बाद खुली चर्चा में प्रतिभागियों के प्रश्नों का समाधान किया गया।

Narender Dhawan
Author: Narender Dhawan

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