दिल्ली में दो दिनों में दो सगे भाइयों को आवारा कुत्तों ने नोंच-नोंचकर मार डाला

नई दिल्ली। गलियों में कुत्तों की तादात दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है जिसके चलते इनका खौफ लोगों में भी बढ़ता जा रहा है। गलियों में डिलीवरी करने आए डिलीवरी मैन, मेहमान और कई लोगों को कुत्तों का खौफ रहता है। राजधानी दिल्ली से एक हृदय विदारक मामला सामने आया है। वसंतकुंज इलाके में 8 से 10 आवारा कुत्तों ने दो सगे मासूम भाईयों को दो दिन में नोंच-नोंचकर मार डाला। एक ही परिवार के दो बच्चों को कुत्तों के झुण्ड ने काट और नोच-नोच कर मार डाला। बच्चों की पहचान 7 वर्ष आनंद और 5 वर्षीय आदित्य के रूप में हुई है।

आपको बता दे​ कि आवारा कुत्तों ने 10 मार्च को पहले बड़े भाई आनंद को नोच-नोच कर मार डाला और 12 मार्च को छोटे भाई आदित्य को अपना निशाना बनाया। जानकारी के अनुसार, 10 मार्च को आनंद जब घर नहीं लौटा तब उसकी मां ने थाने में मिसिंग कंप्लेंट लिखवाई जिसके बाद पुलिस हरकत में आयी और दो घंटे की लगातार तलाश के बाद आनंद का शव एक सुनसान जगह पर मिला, जिसके शरीर पर कई चोटें थीं जो किसी जानवर के कारण लग रही थीं। क्षेत्रवासियों ने पुलिस को बताया की यह काम आवारा कुत्तों ने किया होगा। फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल की जांच की और शव को पोस्टमार्टम के लिए सफदरजंग अस्पताल भेजा गया।

वहीं दूसरा भाई आदित्य पर कुत्तों ने रविवार सुबह हमला कर दिया। पास में मौजूद आदित्य के चचेरे भाई चंदन व वहां गश्त कर रहे दिल्ली पुलिस के एसआई महेंद्र ने उसे कुत्तों ने छुड़ाया। दोनों ने उसे स्पाइनल इंजुरी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने दोनों भाईयों के शवों का पोस्टमार्टम करवा दिया है। दोनों भाईयों के शरीर पर कुत्तों के नोंचने के काफी निशान पाए गए हैं। दूसरी तरफ कुत्तों के आतंक से सिंधी कैंप व आसपास के इलाकों में दहशत फैल गई है। लोग अपने घरों में रहने को मजबूर हो गए हैं। पुलिस अन्य कोणों से भी जांच कर रही है।

सूत्रों से यह भी खबर है की रंगपुरी पहाड़ी पर कई मीट की शॉप है जहां से कुत्ते अपना खाना ढूँढ़ते है, जिसके चलते वह और खूंखार होते जा रहे हैं। पिछले कई दिनों से वह मीट की तलाश में कई बार बकरियों व सूयरों को अपना शिकार बना रहे थे।

आपको बता दे कि कम्मेंवेल्थ गेम्स के चलते कुत्तों के पता करने के लिए सर्वे किया जिससे पता लगा कि राजधानी में कुल 5 लाख से ज्यादरा आवारा कुत्ते है व इन कुत्तों की तादात लगातार बढ़ती जा रही थी जिसके बाद कुत्तों की नसबंदी का काम शुरू करा गया, जिसमें कई NGO’s ने भी सहायता की। शुरुआत में हर वर्ष 20 से 30 हजार कुत्तों की नसबंदी हुई, लेकिन अब प्रतिवर्ष 50-60 हजार कुत्तों की नसबंदी की जा रही है। वहीं, वर्ष 2007 के बाद कुत्तों की संख्या का पता लगाने के लिए कोई सर्वे नहीं हुआ, लेकिन एक अनुमान के अनुसार दिल्ली में अभी करीब 7 लाख लावारिस कुत्ते हो सकते हैं। इस नसबंदी अभियान से कुत्तों की आबादी में कमी आने की जगह उनकी तादात में बढ़ोतरी सामने आई जिसमे कहा गया की कई कुत्तों की नसबंदी नहीं की गयी है जिससे कुत्तो की तादात गलियों में बढ़ती जा रही है।

कई कंप्लेंट के बाद भी इन कुत्तों पर कोई जांच नहीं हो रही , उसी के साथ उनकी नसबंदी भी नहीं कराई जा रही है। गौरतलब है कि इस घटना के सामने आते ही निगम के पशु चिकित्सा विभाग ने कुत्तों को पकड़ने के लिए टीम भेजी और पूरे इलाके से कुल 20 कुत्तों को पकड़ा गया।

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Author: Harnam

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